भारतीय अर्थव्यवस्था 1950 – 1990 भारतीय अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था , पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans): प्रत्येक पाँच वर्ष के लिए सरकार विकास कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने लिए सामूहिक रूप से कुछ योजनाएँ तैयार करती है जिसमें इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम एवं नीतियों […]
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अध्याय-3: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरणः एक समीक्षा
उदारीकरण; निजीकरण और वैश्वीकरणः एक समीक्षा उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरणः स्वतंत्र भारत में समाजवादी तथा पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के गुणों को सम्मिलित करते हुए मिश्रित आर्थिक ढांचे को स्वीकार किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था की अक्षम प्रबंधन ने 1980 के दशक तक वित्तीय संकट उत्पन्न कर दिया। सरकारी नीतियों और प्रशासन के […]
अध्याय-4: भारत में मानव पूँजी का निर्माण
भारत में मानव पूँजी का निर्माण भारत में मानव पूँजी निर्माण: हमें कार्यों को कुशलतापूर्वक करने के लिए अच्छे प्रशिक्षण तथा कौशल की आवश्यकता होती है। किसी शिक्षित व्यक्ति के श्रम-कौशल अशिक्षित व्यक्ति से अधिक होते हैं। कोई शिक्षित व्यक्ति अशिक्षित व्यक्ति के अपेक्षा, अधिक आय का सृजन […]
अध्याय-5: ग्रामीण विकास (भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास)
ग्रामीण विकास (भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास) ग्रामीण विकास ग्रामीण विकास से अभिप्राय उस क्रमबद्ध योजना से है जिसके द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर तथा आर्थिक व सामाजिक कल्याण में वृद्धि की जाती है। ग्रामीण विकास के मुख्य तत्व भूमि के प्रति इकाई कृषि उत्पादकता को बढ़ाना कृषि विपणन […]