लोकतंत्र और विविधता लोकतंत्र और विविधता प्रतिस्पर्धा एवं जनसंघर्ष का अर्थ लोकतंत्र के विकास में प्रतिस्पर्धा और जनसंघर्ष का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है | जब शासक और शासन में भागीदारी चाहनेवालों अर्थात् जनता के बीच संघर्ष होता है तो ऐसी स्थिति में ही लोकतंत्र मजबूत होता है और उसका विकास […]
Home
अध्याय 4 : जाति, धर्म और लैंगिक मसले( नागरिक शस्त्र )
जाति, धर्म और लैंगिक मसले :सामाजिक विभाजन एवं राजनीति में जाति सामाजिक विभाजन के निर्धारक तत्त्वों में जाति एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है | राजनीति में जाती सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों रूपों में अपनी भूमिका निभाती है | जातिगत विषमताएँ – दुनिया के अन्य समाजों से भिन्न भारतीय समाज की […]
अध्याय 5 : जन संघर्ष और आंदोलन( नागरिक शस्त्र )
जन संघर्ष और आंदोलन( नागरिक शस्त्र ) जन संघर्ष और आंदोलन जन संघर्ष का मतलब है, लोगों के बीच होने वाला संघर्ष. संघर्ष का मतलब है, दो या ज़्यादा लोगों या समूहों के बीच मतभेद, प्रतिरोध, या विरोध होना. संघर्ष, जीवन का एक हिस्सा है और यह हमें अपने लक्ष्यों को पाने […]
अध्याय 6 : राजनीतिक दल( नागरिक शस्त्र )
राजनीतिक दल जब जनता सीधे रूप से शासन में भाग लेती है तो ऐसी शासन-व्यवस्था को प्रत्यक्ष लोकतंत्र (Direct Democracy) कहा जाता है राजनीतिक दल का अर्थ सामान्य रूप में राजनीतिक दल का अर्थ “मनुष्यों का ऐसे समूह से है जो किसी सिद्धांत विशेष के आधार पर सहमत हो और […]




